जब तुम्हारे हाथ बढ़ते हैं
मेरी तरफ, प्यार,
तो उड़ते उड़ते क्या लाते हैं मेरे लिए वो ?
क्यों रुक जाते है वो
मेरे अधरों पे, अचानक,
क्यों मुझे लगता है ऐसे
जैसे पहले
मैंने उन्हें छुआ है
जैसे पहले वे मौजूद थे
गुजर चुके थे
मेरे मस्तक से, मेरी कमर से.
उनकी नर्मियाँ
वक़्त के साथ उड़ान भरती हुई आईं
समंदर से होते हुए, कुहासे के ऊपर से,
बसंत के पार,
और जब तुमने रक्खे
मेरे सीने पर अपने हाथ,
तो मैंने पहचान लिया
उन सुनहरे फाख्ते के पंखो को
मैंने पहचान लिया
उनकी मिट्टी को
और कनक सरीखे उस रंग को.
सालों साल ज़िन्दगी भर
मैं ढूंढता रहा उन्हें इधर-उधर.
मैं सीढ़ियों पर चढ़ गया,
भित्तियों को पार किया,
रेलगाड़िया मुझे ले गईं
पानी मुझे बहा लाया,
और अंगूर की त्वचा में
मुझे लगा कि मैंने तुम्हें छू लिया है.
लताओं में अचानक
मुझे तुम्हारा स्पर्श मिला,
बादामों ने मुझे बता दिया
तुम्हारी छुपी कोमलता का,
जब तक तुम्हारे हाथ
मेरी सीने पे पहुंच नहीं गए
और तहां दो पंखों की तरह
उन्होंने अपनी यात्रा पूरी कर ली.
-------
Originally in Spanish- Tus Manos Translated from English from the book The Captain's verses.
[Neruda was one of the most loved poet of 19th century. People who read his poems keep falling in love with his poems even today. 'Your Hands' is the poem he wrote for his wife, Mtilde Urutia, in his secret collection: Los versos del Capitan (The Captain's verses).
Neruda's poems has not been translated much in Hindi. With this poem, I hope to start translating some of my favourite poems in Hindi.]
मेरी तरफ, प्यार,
तो उड़ते उड़ते क्या लाते हैं मेरे लिए वो ?
क्यों रुक जाते है वो
मेरे अधरों पे, अचानक,
क्यों मुझे लगता है ऐसे
जैसे पहले
मैंने उन्हें छुआ है
जैसे पहले वे मौजूद थे
गुजर चुके थे
मेरे मस्तक से, मेरी कमर से.
उनकी नर्मियाँ
वक़्त के साथ उड़ान भरती हुई आईं
समंदर से होते हुए, कुहासे के ऊपर से,
बसंत के पार,
और जब तुमने रक्खे
मेरे सीने पर अपने हाथ,
तो मैंने पहचान लिया
उन सुनहरे फाख्ते के पंखो को
मैंने पहचान लिया
उनकी मिट्टी को
और कनक सरीखे उस रंग को.
सालों साल ज़िन्दगी भर
मैं ढूंढता रहा उन्हें इधर-उधर.
मैं सीढ़ियों पर चढ़ गया,
भित्तियों को पार किया,
रेलगाड़िया मुझे ले गईं
पानी मुझे बहा लाया,
और अंगूर की त्वचा में
मुझे लगा कि मैंने तुम्हें छू लिया है.
लताओं में अचानक
मुझे तुम्हारा स्पर्श मिला,
बादामों ने मुझे बता दिया
तुम्हारी छुपी कोमलता का,
जब तक तुम्हारे हाथ
मेरी सीने पे पहुंच नहीं गए
और तहां दो पंखों की तरह
उन्होंने अपनी यात्रा पूरी कर ली.
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Originally in Spanish- Tus Manos Translated from English from the book The Captain's verses.
[Neruda was one of the most loved poet of 19th century. People who read his poems keep falling in love with his poems even today. 'Your Hands' is the poem he wrote for his wife, Mtilde Urutia, in his secret collection: Los versos del Capitan (The Captain's verses).
Neruda's poems has not been translated much in Hindi. With this poem, I hope to start translating some of my favourite poems in Hindi.]
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